ग्वालियर ( ईएमएस ) | ग्वालियर भिंड इटावा हाईवे (मौत का हाईवे) को लेकर 16 मार्च सोमवार को बरेठा टोल प्लाजा पर रोड नहीं तो ,टोल नहीं का आयोजन संत समिति के अध्यक्ष कालिदास महाराज जी की सानिध्य में किया गया इस आंदोलन में हजारों की संख्या में संत, भूतपूर्व सैनिक, समाजसेवी संगठन, सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि, विभिन्न समाजों के प्रमुख तथा बड़ी संख्या में आम जनमानस उपस्थित रहे। दोपहर 12:00 बजे प्रारंभ हुई इस आंदोलन में सबसे पहले संत कालिदास महाराज जी ने ग्वालियर भिंड इटावा हाईवे सिक्स लाइन बने इसके लिए विगत दो वर्षों से किए जा रहे आंदोलन ,प्रदर्शन की पूरी जानकारी मीडिया और सभी आम जनमानस के सामने रखी भिंड ग्वालियर हाईवे पर प्रतिदिन हो रहे एक्सीडेंट और उनमें लोगों की हो रही मौतों को लेकर महाराज जी ने दुख व्यक्त किया और कहा कि संत समाज अब आगे और लोगों को इस प्रकार से नहीं मरने देगा इसीलिए संत समाज आज रोड नहीं तो टोल नहीं आंदोलन करने के लिए बैठ गया है और ठोस निर्णय के बाद ही यहां से उठेगा। आज के आंदोलन में भिंड ,मुरैना और ग्वालियर जिले के प्रमुख संत उपस्थित रहे साथ ही बाहर से भी संतो का आगमन हुआ संतों में प्रमुख रूप से संत समिति के अध्यक्ष कालिदास जी महाराज, पूज्य संत चीलोंगा जी महाराज, बरुआ महाराज, त्रिमूर्ति सरकार सहित बड़ी संख्या में संतों की उपस्थिति रही। दूधिया महाराज के द्वारा तेज धूप में बीच रोड पर धूमी लगाकर बैठना आंदोलन का मुख्य केंद्र रहा । ग्वालियर चंबल संभाग के प्रमुख जन प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात मंच के माध्यम से रखी तथा सभी ने एक स्वर में कहा कि हम सभी महाराज जी के आदेश अनुसार धर्म ध्वजा के नीचे हैं और इस आंदोलन में महाराज जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। आंदोलन में लगातार बढ़ती भीड़ को देखकर सभी प्रशासनिक अधिकारी, NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकारियों को लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचे तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के द्वारा संत समाज तथा आंदोलन में हजारों की संख्या में उपस्थित आंदोलनकारी को लिखित में आश्वासन दिया जिसमें प्रमुख रूप से बताया गया 31 मार्च 2026 तक डीपीआर जमा हो जाएगी और 30 अप्रैल 2026 तक टेंडर प्रक्रिया हो जाएगी। संत कालिदास महाराज जी के द्वारा ऐसी मांग भी की गई संत और भूतपूर्व सैनिक से किसी प्रकार का टोल ना लिया जाए जिसकी भी मौखिक स्वीकृति दे दी गई है संत समाज की हुई इस जीत के बाद रोड नहीं तो टोल नहीं आंदोलन को स्थगित कर दिया गया।