राज्य
16-Mar-2026
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Yadav) प्रत्येक विधानसभा में आयोजित होंगे कृषि सम्मेलन विधानसभावार कृषि सम्मेलन के लिए कृषि विभाग देगा 5 लाख रुपए लघु कृषकों को उन्नत खेती के लिए किराये पर उपलब्ध कराये जाएंगे कृषि यंत्र डेढ़ साल में प्रदेश का दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर हुआ 12.50 लाख लीटर प्रतिदिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम भोपाल (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल सहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पवार सहित मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि, एफपीओ के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मध्यप्रदेश के पुराने विधानसभा भवन का पवित्र स्थान है। इस स्थान पर कृषक कल्याण योजनाओं पर केन्द्रित कार्यशाला राज्य सरकार के कृषि क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।उन्हें साकार करने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध कलेक्शन 25 प्रतिशत बढ़ा है। अब प्रदेश में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध कलेक्शन किया जा रहा है। दूध का मूल्य भी 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र में नरवई प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीन उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण के लिए माता यशोदा योजना शुरू करने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्रों की दुकानें खुलेंगी, जिनसे लघु कृषकों को खेती के लिए किराये पर यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करें, इसके लिए कृषि विभाग ने प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपए आवंटित करने का निर्णय किया है। इन प्रयासों से कृषि कल्याण के लिए सकारात्मक वातावरण बनेगा। किसान सौर बिजली उत्पादन की सभी योजनाओं का लाभ उठाएं। लघु-कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए भी कार्य करें। प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश अब हजार और लाख में नहीं, मिलियन, बिलियन और ट्रिलियन में बात करने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से कृषि में चौथे स्थान पर है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश कई खाद्यान्नों के उत्पादन में देश में, पहले और दूसरे स्थान पर हैं। मध्यप्रदेश चौथे स्थान पर भी रहते हुए देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के किसानों को सस्ती दरों पर बिजली और सिंचाई के लिए पम्प उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 54 लाख हैक्टेयर है। राज्य सरकार ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के सपने को साकार करते हुए सिंचाई का रकबा आगामी वर्षों में 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में दूध एवं डेयरी क्षेत्र में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी के साथ बढ़ी है। इसी प्रकार प्रदेश का बजट वर्ष 2003-24 में 23 हजार था, जो अब 4 लाख 38 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें कृषि कल्याण वर्ष महत्वपूर्ण योगदान देगा। विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश की बड़ी भूमिका होगी। अपर मुख्य सचिव जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास डॉ. राजेश राजौरा ने प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं से निरंतर बढ़ रहे सिंचाई प्रतिशत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आने वाले कुछ समय में एक लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। डॉ. राजौरा ने अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी और बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से इन परियोजनाओं की स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त हुआ। मध्यप्रदेश का बड़ा क्षेत्र इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से लाभान्वित होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश पिछले 10 साल से कृषि क्षेत्र में 2 अंकों में वृद्धि कर रहा है। इस गति को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार कई विभागों को जोड़कर कृषक कल्याण वर्ष मना रहे हैं। कार्यशाला में जैविक खेती, उद्यानिकी में नर्सरी, कोदो-रागी जैसे मोटे अनाजों से आइसक्रीम निर्माण, केज कल्चर सहित अनेक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। मत्स्य पालन, संस्कृति, पर्यटन, खाद्य एवं नवकरणीय ऊर्जा सहित कई विभागों ने अपनी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की है। अपर मुख्य सचिव कुटीर और ग्रामोद्योग विभाग के.सी. गुप्ता ने मध्यप्रदेश में छोटे और कुटीर उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न शिल्पों के विशेषज्ञ कलाकारों और अन्य शिल्पियों की सहायता के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। शिल्पियों को उत्पादों की बिक्री के लिए भी आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जा रही है। कृषि सचिव निशांत वरवड़े ने प्रेजेंटेशन में बताया कि 11 जनवरी 2026 को कृषि कल्याण वर्ष का शुभारंभ किया गया है। दृष्टि पत्र में आत्मनिर्भर किसान, उन्नत कृषि और मूल्य-श्रृंखला आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माध्यम से समृद्ध प्रदेश का निर्माण करने का उल्लेख है। मध्यप्रदेश एग्रीस्टैक योजना में देश में प्रथम स्थान पर है। इसमें सभी किसानों का डेटा सिंगल क्लिक पर उपलब्ध होता है। योजना में फार्मर रजिस्ट्री, लैंड रजिस्ट्री और फसल रजिस्ट्री यानी गिरदावरी जैसे कार्य किए जा रह हैं। ई-विकास के माध्यम से किसानों को सुगमता पूर्वक खाद वितरण कार्य किया गया है। प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है। ग्रीष्मकालीन उड़द फसल के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने प्रति क्विंटल 600 रुपए बोनस देने का निर्णय लिया है। गेहूं एवं अन्य फसलों की कटाई और नरवाई प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र योजना चलाई जा रही है। प्रदेश की गौशालाओं को भूसा निर्माण के लिए भी यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश के वृंदावन ग्रामों को कृषि ग्राम के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। विधायक अपने क्षेत्र के श्रेष्ठ कृषि ग्रामों को विधायक ट्रॉफी से सम्मानित करेंगे। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश के कृषि आधारित औद्योगिक विकास के लिए अपार संभावनाएं हैं। हमारा प्रदेश मसाले एवं दलहन उत्पादन में भारत में प्रथम, खाद्यान्न उत्पादन में द्वितीय और दूध, फल-सब्जी एवं फूलों के उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। हमारे देश में दूध-फल-सब्जी और दलहन फसलों की प्रोसेसिंग लगभग 15 प्रतिशत के आसपास है, इसे बढ़ावा देने की आवश्यकता है। प्रदेश में आज खाद्य प्रसंस्करण के 4 हजार से अधिक प्लांट हैं। प्रदेश में शासकीय एवं निजी फूड पार्क और मसाला पार्क काम कर रहे हैं। पिछले दो साल में खाद्य प्रसंस्करण एवं मसाला उत्पादन क्षेत्र की 47 कंपनियों ने 20 हजार करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव दिया है। शाजापुर-आगर-मालवा अंचल में कनाडा की एक कंपनी की यूनिट स्थापित होने जा रही है। प्रदेश का वर्तमान एग्री निर्यात 18 हजार करोड़ है, जिसे वर्ष 2028 तक 30 हजार करोड़ तक करने का लक्ष्य है। प्रदेश में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र पर आधारित 36 ओडीओपी हैं। कृषि, वस्त्र एवं अन्य क्षेत्रों को मिलाकर हमें 27 जीआई टैग मिल चुके हैं। इनकी संख्या बढ़ाने की योजना है। कपास उत्पादन में मध्यप्रदेश का देश में 5वां स्थान है। देश में गैर-जीएमओ ऑर्गेनिक कपास उत्पादन का 47 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में है। कपास उत्पादक किसानों को लाभान्वित करने के लिए धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है। यहां 2158 एकड़ क्षेत्र में टैक्सटाइल पार्क से 5 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और करीब 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रदेश में 23 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, इनमें 5 लाख से अधिक मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की हैं। प्रदेश में स्टार्ट-अप की संख्या 7000 हो गई है। करीब 600 स्टार्ट-अप कृषि आधारित हैं। मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के प्रेजेंटेशन में बताया गया कि मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 केज कल्चर योजना लागू की गई है। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 100 करोड रुपए का विशेष प्रावधान किया गया है। सहकारिता विभाग के अंतर्गत शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण वितरण के लिए 25 हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया है। ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कृषक हितग्राही योजनाएं संचालित हैं। एक हेक्टेयर तक की भूमि वाले अनुसूचित जाति, जनजाति के पांच हार्स पावर तक की क्षमता वाले कृषि पंप उपभोक्ताओं को निशुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। समाधान योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सर चार्ज पर छूट प्रदान की जा रही है। उद्यानिकी विभाग के सचिव जॉन किंग्स्ले ने कहा कि वर्तमान में उद्यानिकी क्षेत्रफल 10 प्रतिशत है, जिसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे 5 फसलों में बांटा गया है, जैसे- फल, सब्जी, मसाला, पुष्प, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश के चार जिलों में शुरू की गई मखाना खेती को अन्य जिलों तक बढ़ाया जाएगा। हरि प्रसाद पाल / 16 मार्च, 2026