:: 19 मार्च से शुरू होगा 100 दिवसीय अभियान, 2500 करोड़ की लागत से प्रदेशभर में होंगे जल संरक्षण के काम :: इंदौर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल को प्रकृति का अमूल्य उपहार बताते हुए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण की घोषणा की है। जल का कोई विकल्प नहीं, बूंद-बूंद बचाने का है संकल्प के ध्येय वाक्य के साथ यह राज्यस्तरीय अभियान भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च 2026 को उज्जैन में शिप्रा नदी के तट से शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और जल आत्मनिर्भरता से ही प्रदेश समृद्ध बनेगा। यह अभियान 30 जून तक अनवरत चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को एक सामाजिक आंदोलन बनाकर भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, इस 100 दिवसीय अभियान के लिए सरकार ने 2500 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया है। इस राशि से नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं-बावड़ियों की मरम्मत और सूखी नदियों को पुनर्जीवित करने जैसे कार्य किए जाएंगे। विशेष रूप से इस वर्ष प्रदेश के 10 हजार से अधिक चेक डैम्स और स्टॉप डैम्स के संधारण पर जोर दिया जाएगा ताकि वर्षा जल को रोककर भूजल स्तर में वृद्धि की जा सके। अभियान की सफलता के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल तथा नगरीय विकास विभाग को सह-नोडल बनाया गया है, जिनके साथ शासन के 16 अन्य विभाग मिलकर काम करेंगे। अभियान के पिछले चरणों की सफलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में पहले चरण के दौरान 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं विकसित की गई थीं, जबकि वर्ष 2025 के दूसरे चरण में भी करीब 72 हजार कार्य पूरे हो चुके हैं और 64 हजार से अधिक प्रगति पर हैं। इस वर्ष मनरेगा के तहत खेत तालाब और अमृत सरोवर, अमृत 2.0 के तहत शहरी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार और वन विभाग द्वारा 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में भू-जल संवर्धन के कार्य किए जाएंगे। जल संसाधन विभाग नहरों की सफाई और मरम्मत पर ध्यान देगा, वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पेयजल की गुणवत्ता जांचेगा। अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी को बताते हुए मुख्यमंत्री ने नागरिकों से श्रमदान करने और अपने घरों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करने की अपील की है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में यह अभियान प्रभारी मंत्रियों के नेतृत्व में चलाया जाएगा, जहां जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में विभागीय योजनाओं, सांसद-विधायक निधि और सीएसआर फंड के समन्वय से जल संवर्धन के कार्यों को समय-सीमा में पूरा कराएंगे। इस महाअभियान से न केवल जल संकट दूर होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिलेगी। प्रकाश/16 मार्च 2026