राज्य
28-Mar-2026
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-एनटीसीए की मंजूरी मिलते ही मध्य प्रदेश देगा सौगात भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश की बाघिन जल्द ही झारखंड और आंध प्रदेश राज्य में भी टाइगर्स का कुनबा बढ़ाएगी। छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा के बाद झारखंड और आंध्र प्रदेश ने भी मध्य प्रदेश से बाघ मांगे हैं। आंध्र प्रदेश ने एक बाघिन, जबकि झारखंड ने २ बाघिन और एक बाघ मांगा है। देश में मध्य प्रदेश में बाघों की सबसे ज्यादा संख्या है। उम्मीद लगाई जा रही है कि बाघों की गणना की अगले साल आने वाली रिपोर्ट में प्रदेश में बाघों की संख्या १ हजार पार पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश में बाघों की संख्या में पिछले सालों के मुकाबले सुधार आया है। साल २००६ में आंध्र प्रदेश में बाघों की संख्या ९५ थी, जो साल २०१० में घटकर ७२, २०१४ में ६८ और २०१८ में घटकर ४८ रह गई थी। इसके बाद प्रदेश में बाघों के संरक्षण को लेकर काम शुरू हुआ। इसका नतीजा २०२२ में दिखाई दिया। यहां बाघों की संख्या बढक़र ६३ पहुंच गई। वहीं चरण चार की निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक २०२३-२४ में बाघों की संख्या बढक़र ८७ हो गई है। आंध्र प्रदेश ने बाघों के कुनबे में बढ़ोत्तरी के लिए मध्य प्रदेश वन विभाग से भी मदद मांगी है। आंध्र प्रदेश ने एमपी से एक बाघिन मांगी है। इसे आंध प्रदेश के पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान के गोदावरी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। इस उद्यान को १९९२ में स्थापित किया गया था। झारखंड ने मांगे दो बाघिन और एक बाघ उधर झारखंड राज्य ने भी प्रदेश में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश से मदद मांगी है। झारखंड ने मध्य प्रदेश से एक बाघ और दो बाघिन मांगा है। झारखंड ने इसके लिए एनटीसीए को भी प्रस्ताव सौंपा है। एनटीसीए की मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में आगे कदम बढ़ाया जाएगा। झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। यहां अभी तीन से चार बाघ ही मौजूद हैं। झारखंड ने मध्य प्रदेश से बाघ के अलावा सांभर हिरण भी मांगे हैं। हालांकि वन विभाग वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन के मुताबिक दोनों राज्यों ने टाइगर मांगे हैं, अभी इस पर विचार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ ने पहले मांगा बाघ, फिर नहीं ली सुध आंध्र प्रदेश और झारखंड से पहले छत्तीसगढ़, ओडिशा और राजस्थान भी मध्य प्रदेश से बाघ मांग चुके हैं। राजस्थान में पिछले साल दिसंबर माह में बाघ को भेजा जा चुका है, जबकि ओडिशा में दो मादा बाघ और एक नर बाघ भेजा जाना है। इसी तरह छत्तीसगढ़ को भी तीन बाघ भेजे जाने हैं। इनमें एक बाघिन और २ नर बाघ हैं। इसके लिए एनटीसीए की पहले ही अनुमति मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ भेजे जाने वाले बाघों का चुनाव भी कर लिया गया है। हालांकि छत्तीसगढ़ द्वारा इसके लिए संपर्क ही नहीं साधा जा रहा है। बाघ भेजने की प्रकिया आसान नहीं एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर एक टाइगर रिजर्व से दूसरे टाइगर रिजर्व में भी टाइगर को भेजे जाने के लिए एक पूरी प्रक्रिया का पालन करना होता है। वन विभाग को इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए की अनुमति लेनी होती है। रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी सुदेश बाघमारे कहते हैं कि कोई भी राज्य दूसरे राज्य से सीधे टाइगर न मांग सकता है और न ही दे सकता है। इसके लिए सबसे पहले संबंधित राज्य को एनटीसीए को प्रस्ताव भेजना होता है। इसमें बताना होता है कि वह बाघ को क्यों ला रहे हैं और उसे कहां रखा जाएगा? इसके लिए किस तरह की जमीनी तैयारी की गई है। एनटीसीए के अनुमति के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून बाघ मांगने वाले राज्य का दौरा करता है और जमीनी हकीकत देखता है। इसके बाद वह अपनी रिपोर्ट एनटीसीए को सौंपता है। रिपोर्ट के आधार पर ही एनटीसीए बाघ की शिफ्टिंग की परमिशन देता है। विनोद/ 28 मार्च /2026