राज्य
28-Mar-2026


:: 20% का था सरकारी लक्ष्य, इंदौर ने 30% की छलांग लगाकर सबको चौंकाया; 8 चरणों में रिकॉर्ड तोड़ ई-टेंडरिंग :: इन्दौर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री मोहन यादव के राजस्व सुदृढ़ीकरण विजन को इंदौर ने नई ऊंचाई दी है। कलेक्टर शिवम वर्मा के मार्गदर्शन में आबकारी विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए अब तक की ई-टेंडरिंग में ₹2001.92 करोड़ का भारी-भरकम राजस्व जुटाया है। खास बात यह है कि शासन ने 20% वृद्धि का लक्ष्य रखा था, लेकिन इंदौर ने 30.27% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ इंदौर जिला पूरे मध्यप्रदेश में राजस्व वृद्धि के मामले में शीर्ष पर पहुंच गया है। :: गणित समझिए : पिछले साल से ₹465 करोड़ ज्यादा :: विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में वार्षिक मूल्य ₹1536.76 करोड़ था। इस बार यह आंकड़ा ₹2001.92 करोड़ तक जा पहुँचा है। अब तक 59 समूहों में से 47 समूहों (156 दुकानें) का निष्पादन हो चुका है। इन समूहों के आरक्षित मूल्य ₹1844.11 करोड़ के मुकाबले विभाग को ₹157.80 करोड़ की अतिरिक्त आय (प्रीमियम) हुई है। :: सफलता के 3 बड़े कारण :: - सिंडिकेट का खात्मा : पारदर्शी ई-टेंडरिंग के कारण पुरानी गुटबाजी टूटी और वास्तविक बोलीदाताओं को समान अवसर मिला। - स्मार्ट ग्रुपिंग : कलेक्टर के विजन से समूहों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्गठन किया गया, जिससे छोटे समूहों में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ी। - टारगेट ओरिएंटेड एप्रोच : 8 चरणों तक चली लंबी प्रक्रिया में विभाग ने बाजार की नब्ज पहचानते हुए रणनीतिक बदलाव किए। :: टॉप-5 ग्रुप्स, जहाँ मची सबसे ज्यादा होड़ :: पुनर्गठन के कारण इन प्रमुख समूहों में औसत 36% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है: ------------------------------------------------------------------------------------------ समूह का नाम पिछले साल का मूल्य इस बार का ऑफर वृद्धि (रुपये में) ------------------------------------------------------------------------------------------ स्कीम नं. 54 ₹134.95 करोड़ ₹153.33 करोड़ 18.38 करोड़ एम.आर.-9 ₹130.09 करोड़ ₹150.20 करोड़ 20.11 करोड़ चंद्रगुप्त चौराहा ₹99.38 करोड़ ₹113.57 करोड़ 14.19 करोड़ एम.आई.जी. ₹98.03 करोड़ ₹111.11 करोड़ 13.08 करोड़ मांगलिया ₹41.94 करोड़ ₹52.83 करोड़ 10.89 करोड़ ------------------------------------------------------------------------------------------ अब आगे क्या? विभाग के पास अभी 05 समूहों की 17 दुकानें शेष हैं, जिनका आरक्षित मूल्य ₹258.31 करोड़ है। इनके निष्पादन के बाद राजस्व का यह आंकड़ा और भी ऊपर जाने की उम्मीद है। इंदौर का यह प्रदर्शन अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए राजस्व मॉडल बन चुका है। प्रकाश/28 मार्च 2026